Saturday, 10 July 2010

तुमने पूछा..

तुमने पूछा मुझसे
मुझसे मिलना चाहती हो?
मुझे छूना चाहती हो?
सोचने लगी कि क्या चाहती हूँ मैं
जानना चाहोगे क्या जवाब मिला?
तुमसे मैंने खुद को पाया है
मेरी आत्मा जो मुझे छोड़कर
जाने लगी थी
लौट आई मुझ में
जीती रही हूँ मैं
तुमको खुद में
तुम्हे छुआ है,पाया है
कई बार
तुम मेरे लिए एक सपना हो
एक मीठा सपना
जो पलकों पे सजाये
मैं मीठी नींद सो रही हूँ
इसीलिए शायद
एक डर है मन में
कि तुमसे मिलकर
मेरा सुन्दर सपना कहीं टूट न जाये
वरना टूट जाउंगी मैं भी
जीना चाहती हूँ मैं इस सपने को
सारी उम्र
और सोना चाहती हूँ
तुम्हें लिए हुए
इन पलकों में,बस...

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