Saturday, 10 July 2010

तुम संग

तुम संग जीवन कैसा होगा
तुम्ही बताओ मेरे मन
चंद प्यारी बातें होंगी
कुछ मीठी सौगातें होंगी
यूँ बरसेगा स्नेह का सावन
जिसमें भीगेंगे तन और मन
तेरा मेरा साथ होगा
और हाथों में हाथ होगा
गुथी हुई सी सासें होंगी
कुछ बेचैन उमासें होंगी
चला करेंगे चाँद तक
गिन गिन कर ये सारे तारे
भर लायेंगे जेबों में सारे
फिर अंधियारी सी रातें होंगी
पर साथ तुम्हारा होगा मन
तुम संग जीवन कैसा होगा
तुम्ही बताओ मेरे मन...

1 comment:

  1. क्या बात है..बहुत खूब....बड़ी खूबसूरती से दिल के भावों को शब्दों में ढाला है.

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