Friday, 2 October 2009

चलो

कोई ख्वाहिश न रहे बाकी,
मेरे साथ,
चलो तुम्हें उस राह पर ले चलूँ,
हाथों में थामो मेरा हाथ,
चलो तुम्हें उस राह पर ले चलूँ,
जहाँ सूरज चमकता हो रात भर,
तारे जगमगायें कदमों पर,
चलो तुम्हें....
धरती रहे थमी और आसमान चले साथ,
नदी न ढूंढे समंदर का किनारा,
और तुम रहो मेरे साथ,
चलो तुम्हें उस राह पर ले चलूँ,
तेरी पलकों के सिरहाने ख्वाब बनके,
बैठी रहूँ मैं रात भर,
बरसती रहे चाँदनी,
और छू सकूँ मैं खुशबू तेरी,
बढ़ाकर अपना हाथ,
कोई ख्वाहिश न रहे बाकी,
मेरे साथ,
चलो तुम्हें उस राह पर ले चलूँ...

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